हमारे शास्त्र कहते हैं गावो-विश्वस्य मातर: गाय विश्व की माता है। इसीलिए हम गौमाता की जय बोलते हैं। गौमाता की जय हमारी ही जय है। गाय बचेगी तो हमारा देश बचेगा, अन्न बचेगा, खेत बचेगा, धर्म और संस्कृति बचेगी। गौरक्षा के लिए हमारे गुरु-साधु, संत, राजा-प्रजा ने बडे-बडे बलिदान दिए हैं, संघर्ष किए हैं। भारत की संस्कृतिक को भारतभूमि को, भारत की आत्मा को, जनता के स्वास्थ्य को, कृषि और किसान को, भारत की जलवायु और प्रकृति को, धर्म को, राष्ट्रीय स्वाभिमान को सुरक्षित रखने के लिए गौरक्षा बहुत आवश्यक है। गौमाता को जीवन देकर ही एक भारतीय गौभक्त अपने गौदान के संकल्प को पूरा कर सकता है। गौ इस संसार का एक अद्भुत प्राणी है। गौ वास्तव में सबके लिए आदरणीय, पूजनीय और कल्याणकारी है।

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