13.पञ्चगव्य- चिकित्सा

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…………..,,,,पञ्चगव्य- चिकित्सा……………… 


१ – दाद खुजली- अडूसे के दस से बारह पत्र तथा दो से पाँच ग्राम हल्दी को एक साथ गोमूत्र में पीसकर लेप करने से खुजली व शोथ कण्डुरोग शीघ्र नष्ट होता है ।इससे दाद उक्वत में भी लाभ होता है । 


२ – आमदोष- मोथा ,बच,कटुकी, हरड़ ,दूर्वामूल ,इन्हें सम्भाग मिश्रित कर ५-६ ग्राम की मात्रा लेकर १०-२० मि०ली० गोमूत्र के साथ शूल में आमदोष के परिपाक के लिए पिलाना चाहिए । 


३ – अगस्त के पत्तों का चूर्ण और कालीमिर्च का चूर्ण समान भाग लेकर गोमूत्र के साथ बारीक पीसकर मिर्गी के रोगी को सूघाँने से लाभ होता है । 


४ – अगस्त के पत्तों को गाय के घी में भूनकर खाने से और गाय के घी का ही सेवन करने से दृष्टिमांद्य ,धंुध या जाला कटता है । 


५ – बुद्धिवर्नार्थ- अगस्त के बीजों का चूर्ण ३-१० ग्राम तक गाय के २५० ग्राम धारोष्णदूध के साथ प्रात: – सायं कुछ दिन तक खाने से स्मरणशक्ति तीव्र हो जाती है । 


६ – गाय के १ किलो मूत्र में अजवायन लगभग २०० ग्राम को भिगोकर सुखा लें इसको थोड़ी -थोड़ी मात्रा में गौमूत्र के साथ खाने से जलोदर मिटता है । 


७ – स्वच्छ अजवायन के महीन चूर्ण को ३ ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार गाय के दूध से बनी छाछ के साथ सेवन करने से पेट के कीड़ों का समूल नाश होता है । 


८ – कफ अधिक गिरता हो , बार-बार खाँसी चलती हो ,ऐसी दशा में अजवायन का सत् १२५ मिलीग्राम , गाय का घी २ ग्राम और शहद ५ ग्राम में मिलाकर दिन मे ३ बार खाने से कफोत्पत्ति कम होकर खाँसी में लाभ होता है । 


९ -शूल,अनाह आदि उदर विकारों पर – अमाशय में रस के कम होने से या अधिक भोजन करने के बाद पेट फूल जाता है तो एसे मे अजवायन १० ग्राम ,छोटी हरड़ ६ ग्राम , गाय के घी में भूनी हुई हींग ३ ग्राम और सेंधानमक ३ ग्राम ,इनका चूर्ण बनाकर हल्के गरम पानी के साथ सेवन करें । 


१० – गर्भाशय की पीड़ा – गर्भाशय की पीड़ा मिटाने के लिए खुरासानी अजवायन गोमूत्र में मिलाकर पीस लें और फिर इस पेस्ट मे रूई भिगोकर बत्ती बना लेवे तथा उस बत्ती को योनि में रखकर सोये तो गर्भाशय की पीड़ा शान्त होगी । 

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