गौ व्यथा की एक छोटी सी कथा…..

Posted on Posted in Uncategorized

गौ व्यथा की एक छोटी सी कथा……
एक गौशाला समिति द्वारा आयोजित सभा में आमंत्रित एक अतिथि महोदय ने भावुक कर देने वाला भाषण दिया।
गौ माता की रक्षा करना ही धर्म है, और साथ ही बताया कि गाय के शरीर में कितने तरह के देवी देवताओं का वास होता है।
गाय को क़त्ल किये जाने से पहले उसे दी जाने वाली यातनाओं के बारें में बताकर तो उन्होंने सभा के माहौल को मार्मिक ही कर दिया।
अतिथि महोदय ने जोशीले अंदाज में धर्म एवं शास्त्रों की दुहाई देते हुए आह्वाहन किया कि गायों को कटने से रोकने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर देने चाहिए।
उन महोदय की खूब जय-जयकार हुई, वे फूल मालाओं से लाद दिए गए।
धर्म के लिए बहुत बड़ा काम करने की अनुभूति और विजयी मुद्रा लिए वह महोदय जी अपने घर वापस लौटे।
घर के एक कोने में पड़ी भूखी बूढ़ी गाय ने कातर नजरों से उन्हें देखा।
महोदय जी के सारे जोश पर पानी फिर गया मानो पूरा ब्रह्माण्ड जल उठा हो।
महोदय ने बेटे को आवाज लगायी एवं जोर से चिल्लाकर कहा-“कितनी बार कहा है इस बूढ़ी और बेकार गाय को बेच आओ।“
बेटे ने झुँझला कर कहा- “कोई ग्राहक मिले तब ना।“
महोदय जी गरजे- “अरे कोई ग्राहक ना मिले तो दूर जाकर कहीं सड़क पर ही छोड़ आओ, बैठे-बैठे चारा खाती है, जगह भी घेर रखी है।”
महोदय जी की पत्नी धीरे से फुसफुसाई – “बाहर छोड़ आये तो कोई कसाई उठाकर ले जाएगा।”
महोदय जी के तलवे का गुस्सा कपार पर चढ़ गया और पाँव पटकते हुए बोले-“ले जाता है तो ले जाए कसाई, हम कितने दिनों तक इसे बैठा कर खिलाते रहेंगे।”
दूसरे कोने मे बैठी महोदय जी की बूढ़ी माँ चुपचाप सब सुन रही थीं।
माँ बोली- “बेटा बूढ़ी तो मैं भी हूं गाय के साथ मुझे भी लेकर चल….

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *