गौ- चिकित्सा.(रक्तप्रदर)

रक्तप्रदर ( ख़ून बहना ) 
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मादा पशु के प्रसव के चारा दाने में गड़बड़ होने से यह रोग कभी – कभी हो जाता है । उसके प्रसव के समय असावधानी रखने के कारण यह रोग हो जाता है । रोगी मादा पशु की योनि से रक्त बहता रहता है । उसमें दुर्गन्ध आती रहती है । वह रोज़ दूध में और शारीरिक शक्ति में कमज़ोर होती है । 


१ – औषधि – गाय के दूध की दही ४८० ग्राम , गँवारपाठे का गूद्दा ४८० ग्राम , पानी ४८० ग्राम , सबको आपस में मिलाकर और मथकर रोगी पशु को दोनों समय उक्त मात्रा में , आराम होने तक पिलाया जाये । 

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