गाय

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 गाय

चौराहे पर बैठी
घुमाती नज़रे इधर-उधर
आने-जाने वाले पर
ललचाई नज़रो से
देखती
चारे की आशा मे
लोग आते है
देखते है
बतियाते है
और आगे निकल जाते है
कोई भी चारा नही डालता
सूर्य की डूबती किरणो के साथ ही
भूखी-प्यासी गाय की
आँखो से गायब होती
आशा की किरण
इतने मे ही कोई दयावान
आता है
चारा डालता है
और
गाय को दुह कर ले जाता है
और गाय शान्त मन से उठ जाती है
अगले दिन फिर से
चौराहे पर आके बैठने के लिए
ताकि कल फिर
कोई दयावान  आए
उसे दुह कर ले जाए
और उसके भूखे बच्चो के
चारे का प्रबन्ध कर जाए

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