॥श्रीसुरभ्यै नमः॥वन्दे धेनुमातरम्॥
यया सर्वमिदं व्याप्तं जगत् स्थावरजंगमम्।
तां धेनुं शिरसा वन्दे भूतभव्यस्य मातरम्॥
हमारी विनती सुनो भगवान
गौमाता की सेवा है बङे पुण्य का काम।
मानो इसकी सेवा को तीर्थ चारों धाम॥
हमारी विनती सुनो भगवान।
गौमाता की सेवा का हमें दे दिजो वरदान॥
हमारी………………………॥
सदा-सदा ही दुष्कर्मों से देकर हमको त्रान।
गौमाता की सेवा में ही लगे हमारा ध्यान॥
हमारी …………………….॥
कहते हैं यों जग के सारे बङे-बङे विद्धान।
गौमाता की सेवा ही हैं सारे सुखों की खान॥
हमारी………………..॥
‘ग’ अक्षर की महिमा गाते सुनो यों संत सुजान।
‘ग’ गंगा, ‘ग’ गाय, ‘ग’ गीता करत जगत कल्याण॥
हमारी……………….॥
हैं यह परम उदार, दयालु रखती सबका मान।
बिना सेवा ही दुग्ध, दही, घृत का नित करे हमें दान॥
हमारी…………………..॥
परोपकारी बछङे भी इसके सांची ली जै मान।
खेंच-खेंच हल, अन्न उपजा कर पालत सकल जहान॥
हमारी……………….॥
पढ़ा रहे हैं पाठ हमें यह सारे वेद पुराण।
गौसेवा को ग्वाल बने थे श्री कृष्ण भगवान॥
हमारी……………..॥
गौसेवा करे सदा शक्ति हमें ऐसी प्रदान करो।
गौसेवा करते-करते ही जाये हमारे प्राण॥
हमारी………………….॥
‘दास रूप नारायण’ के उर भर दीजे यह ज्ञान।
गौमाता की सेवा करले चाहे जो कल्याण॥
हमारी…………………॥
श्री अखिल गोवंश की जय…..
॥जय गोमाता जय गोपाल॥
              एक गऊ प्रेमी

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