२ – गौ- चिकित्सा

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२ – गौ- चिकित्सा

……………गौ – चिकित्सा………… 

१ – थनेला रोग – गाय के थन में गाँठ पड़ जाना व थन मर जाना एेसे मे । अमृतधारा १०-१२ बूँद , एक किलो पानी में मिलाकर ,थनो को दिन मे ३-४ बार धोयें यह क्रिया ५ दिन तक करे । और गाय को एक मुट्ठी बायबिड्ंग व चार चम्मच हल्दी प्रतिदिन देने से लाभ होगा ।एक मसरी की दाल के दाने के बराबर देशी कपूर भी खिलाऐ । 

२ – कलीली,जूँएँ ,घाव के कीड़े व पेट के कीड़े – एक मुट्ठी हल्दी व एक मुट्ठी बायबिड्ंग प्रतिदिन देने से ५-७ दिन देने से पेट के कीड़े ,घाव के कीड़े , कलीली, जूँएँ , अन्य कीड़े सभी मर जाते है । 

३ – थनेला- सीशम के मुलायम पत्ते लेकर बारीक पीसकर सायं के समय थनो पर लेप करें और प्रात: २५० ग्राम नीम की पत्तियाँ १ किलो पानी में पकाकर जब २५० ग्राम रह जाये तो पानी को सीरींज़ में भरकर थन में चढ़ा दें ।और थन को भींचकर व दूध निकालने के तरीक़े से थन को खींचें तो अन्दर का विग्रहों बाहर आयेगा। ऐसी क्रिया को प्रात: व सायं १००-१०० ग्राम पानी बाहर -भीतर होना चाहिए । 

४ – गाय को हीट पर लाना – गाय को हीट पर लाने के लिए काली तोरई पकने के बाद पेंड से तोड़कर आग मे भून लें ,और ठंडी कर लें तथा ठंडी होने पर तोरई की कुट्टी काट कर गाय को खिला दें । गाय दो से तीन दिन में हीट पर आ जायेगी ,तभी गर्भाधान करा दें तो गाय का गर्भ ठहर जायेगा वह गाभिन रहेगी । 

५ – छुवारे लेकर उनकी गीरी निकालकर छुवारों में गुड़ भरकर और छुवारों को गुड़ में लपेटकर रोटी में दबाकर ७-८ दिन तक गाय को खिलाने से गाय हीट पर आती है । 

६ – गाय – बैल को यदि घाव में कीड़े होतों २५० ग्राम गौमूत्र से धोकर , दो गोली कपड़ों में डालने वाला कपूर को पीसकर भर दें और पट्टी बाँध दें ,घाव के कीड़े मर जायेंगे फिर साफ़ करकें गाय के घी को गर्म करकें उसमें कोटन शेंककर घाव पर बाँध दें, घी की पट्टी बदलते रहे घाव ठीक होने तक। 

७ – सरसों तैल १०० ग्राम , २५ ग्राम नमक , ५ ग्राम केरोसिन तैल( मिट्टी तैल ) तीनों को आपस में मिलाकर गाय- बैल के शरीर पर मालिश करके गाय को धूप में बाँध दें तो सभी कलीली भाग जायगी ।
– तम्बाकू १०० ग्राम पीसकर एक किलो पानी में मिलाकर पशुओं के उपर स्प्रे करने से सभी जूँएँ झड़ जायेगी और तम्बाकू तैल में मिलाकर मालिश भी कर सकते है , इससे सभी कलीली व जूँएँ झड़ जायेगी । 
– गौशाला में मुर्ग़ी पालने से गाय की कलीली को मुर्ग़ी चुग लेती है , और गाय आनंदपुर्वक रहती है । 

८ – जेर ( बेल ) डालना – डिलिवरी के बाद जब गाय का बच्चा अपने पैरों पर खड़ा हो जाये , तब गाय का दूध निकाले और उसमें से एक चौथाई दूध को गाय को ही पीला दें ,और बाद मे बाजरा , कच्चा जौं , कच्चा बिनौला , आपस में मिलाकर गाय के सामने रखें इस आनाज को खाने के २-३ घंटे के अन्दर ही गाय जेर डाल देगी और उसका पेट भी साफ़ हो जायेगा । 

९ – छुवारे की आधी गीरी को गुड़ में लपेटकर खिलायें तो गाय जल्दी ही जेर डाल देगी , तथा बाॅस के पत्ते भी खिलाकर जल्दी ही डाल देती है । 

१० – गर्भाधान के बाद गाय अवश्य गाभिन रहे इसके लिए – गर्भाधान से पहले गाय की योनि में किसी पलास्टीक के पतले पाईप मे ५ ग्राम सुँघने वाला तम्बाकू पीसकर भर लें और पाईप को योनि में अन्दर डालकर ज़ोर से फूँक मार दें, जिससे वह तम्बाकू योनि में अन्दर चला जायें,फिर गर्भाधान कराये तो गाय अवश्य ही गाभिन रहेगी । 

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