गाय दूध से जुड़े मिथक और सच्चाई!

  • मिथक- पाश्च्युराइज्ड की अपेक्षा कच्चे दूध में ज्यादा पोषक तत्व होते हैं।
  • सच्चाई – पाश्च्युराइज्ड और कच्चे दूध में पोषक पदार्थो का स्तर समान होता है। पाश्च्युरीकरण की प्रक्रिया में दूध को कम समय के लिए उच्च तापमान (70 डिग्री सेल्सियस) पर गर्म किया जाता है जिससे दूध में मौजूद जीवाणु मर जाते है। दूसरे शब्दों में कहें तो पाश्च्युराइज्ड दूध से किसी भी तरह के संक्रमण का खतरा नहीं होता।
     
  • मिथक- दूध में पानी मिलाने से उसमें से वसा तत्व कम हो जाता है।
  • सच्चाई- दूध में पानी मिलाने से उसमें मौजूद सभी पोषक पदार्थो की सांद्रता कम हो जाती है। दूसरे शब्दों में कहें तो सभी पोषक पदार्थो घनत्व कम हो जाता है।
     
  • मिथक- दूध में से वसा बाहर निकाल लेने पर उसका पोषण खत्म हो जाता है।
     
  • सच्चाई- ऐसे दूध को कम कैलोरी के साथ पोषक तत्व मिलने का बेहतर स्रोत माना जाता है।
     
  • मिथक- यदि आपको लेक्टोस (दुग्ध शर्करा) पसंद नहीं है तो दूध से दूर रहना ही बेहतर।
     
  • सच्चाई- यह जरूरी नहीं कि आपको दूध पसंद हो। लेकिन आप अन्य दुग्ध उत्पाद जैसे पनीर, बटरमिल्क, दही या चीज का सेवन आसानी से कर सकते हैं।
     
  • मिथक- जब कैल्शियम की प्रचुरता वाले और भी उत्पाद हैं तो दुग्ध उत्पादों की कोई जरूरत नहीं।
     
  • सच्चाई- दूध प्राकृतिक रूप से मिलने वाले कैल्शियम का प्रमुख स्रोत है। इसके अलावा दूध में प्रोटीन, मैग्नीशियम, फास्फोरस, जिंक और विटामिन बी जैसे कई पोषक उत्पाद पाए जाते हैं। विटामिन बी हड्डियों के निर्माण में मददगार होता है। इसके अलावा अनाज, मूंगफली और पत्तेदार सब्जियों से मिलने वाला कैल्शियम पूर्ण रूप से अवशोषित नहीं होता।
     
  • मिथक- दूध एक संपूर्ण भोजन है।
     
  • सच्चाई- दूध में लोहा, विटामिन सी, डी, ई और के नहीं पाए जाते। अत: स्वस्थ शरीर के लिए सिर्फ दूध पर ही निर्भर नहीं रहा जा सकता।
  • मिथक- नवजात शिशुओं के लिए अन्य फार्मूला दूधों की अपेक्षा गाय का दूध बेहतर होता है।
  • सच्चाई- गाय दूध से संक्रमण होने की आशंका ज्यादा होती है और उसमें मौजूद वसा आसानी से नहीं पचता। इसी के चलते एक साल से कम उम्र के बच्चों के लिए फार्मूला दूध कहीं बेहतर होता है।
     
  • सच्चाई- शरीर में कैल्शियम की पूर्ति करने के लिए हर उम्र वर्ग को दूध की जरूरत होती है। साथ ही दूध हड्डियों में क्षरण (आस्टियोपोरोसिस और आस्टियोपोरोटिक फ्रेक्चर) को रोकने में मददगार होता है।

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