कविता ***गायों की सेवा करो, रोज नवाओ शीश । खुश होकर देंगी तुम्हें, वे लाखों आशीष ।।

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गायों की सेवा करो, रोज नवाओ शीश ।
खुश होकर देंगी तुम्हें, वे लाखों आशीष ।।
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बछड़े उनके जोतते, खेत और खलियान ।
जिनसे पैदा हो रहे, रोटी-सब्जी-धान ।।
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घास-फूस खाकर करें, दूध, दही की रेज ।
इसी वजह से सज रही,मिष्ठानों की सेज ।।
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गोबर करता है यहाँ, ईधन का भी काम ।
गो सेवा जिसने करी, हो गये चारो धाम ।।
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गो माता करतीं सदा, भव सागर से पार ।
इनकी तुम सेवा करो, जीवन देंगी तार ।।
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गोबर से बढ़िया नही, खाद दूसरी कोय ।
डालोगे गर यूरिया, लाख बीमारी होय ।।
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गो पालीं तब ही बने, कान्हा जी गोपाल ।
दूध-दही से वे करें, सब को मालामाल ।।
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गायों की सेवा करो, और बचाओ जान ।
कान्हा आगे आयेंगे,सुख की छतरी तान ।।
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बची नहीं गायें अगर, ऐसा होगा हाल ।
तरसेंगे फिर दूध को,इस माटी के लाल ।।
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जब भी हो अंतिम समय,करिये गैया दान ।
हमको यह समझा रहे, अपने वेद पुरान ।।

Govats Radheshyam Ravoria

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