गृहिणियां ऐसे करें गौ सेवा

  1. घर में गाय के दूध, दही, घृत का उपयोग करें| पंचगव्य निर्मित साबुन, शेम्पू, उबटन तथा ऐसे ही अन्य उत्पादों का अधिकाधिक उपयोग करें| उत्पादों की अधिक जानकारी के लिए इस लिंक को क्लिक करें| बीमारियों में पंचगव्य औषधियों का उपयोग करें|
  2. भोजन से पहले गो ग्रास देने की आदत सभी परिवारजनों में डालें|
  3. परिवार के बच्चों एवं अन्य सदस्यों के साथ गाय के महत्त्व की चर्चा करें|
  4. गौ से सम्बंधित पर्वों जैसे गोपाष्टमी, गोवत्सद्वादशी, बलराम जयंती, जन्माष्टमी, मकर संक्रांति इत्यादि में सम्मिलित हों|
  5. फलों एवं सब्जियों का उपयोग में न आने वाला हिस्सा कचरे में न डाल, गौवंश को दें| घर के सामने आने वाले गोवंश को पानी पिलायें| बचे हुए अन्न सब्जी आदि को भी गौवंश को समर्पित करें|
  6. प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग न करें! कचरा प्लास्टिक की थैलियों में भरकर न फेंकें क्योंकि ये थैलियाँ ही गाय का आहार बनती हैं तथा प्लास्टिक की थैलियाँ खाने से गौ वंश अस्वस्थ होकर मृत्यु का ग्रास बनता है|
  7. गौ सेवा हेतु दैनिक बचत की प्रक्रिया आरम्भ करें जिसमें एक निश्चित राशि को दैनिक, साप्ताहिक या मासिक रूप से संचित करें| जमा हुई राशि से गो ग्रास खरीद कर गौ वंश को खिलाएं या किसी जिम्मेदार गौ शाला को दान में दें|
  8. भारतीय नस्ल की गाय पालें व गौ सेवा के आनंद का प्रत्यक्ष अनुभव करें|

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देशभर में गौ सेवा की क्रांति की अलक जगाने वाले परम पूज्य गोऋषि पथमेड़ा महाराज जी के श्री चरणो में दंडवत प्रणाम।वृन्दावन से पधारे राधा रमण लालजी के परिकर पूज्य पुण्डरीक जी महाराज एंव परम गोवत्स राधाकृष्णा जी महाराज के श्री चरणो में दंडवत प्रणाम उपस्थित सभी गोवत्सों एंव गौभक्तो को यथा योग्ये नमन एंव वंदन  सादर जय गौमाता जय गोपाल।  
धर्म,अर्थ काम और मोक्ष एंव इनसे भी आगे ईश्वरीय प्रेम को प्राप्त करने हेतु गौ सेवा सर्व सुलभ साधन है। गौमाता की महिमा अपार है। इस संसार में गौ एक अदभुत प्राणी है। जो वास्तव में सबके लिये कल्याणकारी है। अपने शास्त्रो के अनुसार गाय में तैतीस कोटि देवताओ का निवास है। केवल गौमाता के सेवा से अपने सम्पूर्ण देवी देवताओ की सेवा सम्पन हो जाती है। इसीलिए गौमाता को सर्वदेवमहि कहा जाता है। गौ के दर्शन से समस्त देवताओ के दर्शन एंव समस्त तीर्थो की यात्रा का पुण्य प्राप्त होता है तथा गौ-दर्शन,गौ स्पर्श ,गौ पूजन ,गौ स्मरण एंव गोदान करने से मनुष्य सभी पापो से मुक्त हो जाता है। इस प्रकार गौ भारतवासियो की परम आराध्या है। इस लिए भारत सरकार से हमारा निवेदन है कि गौमाता को राष्ट्र माता घोषित करे। प्राचीन काल सभी गौ-सेवापरायण थे,और गाये भी बहुत अधिक थी,जिससे हमारे देश में अन्न -धन  ,सुख शांति एंव समृद्धि थी।  बड़े बुजुर्ग कहते है देश में दूध दही की नदियां बहती थी। 
वर्तमान समय में दुर्भाग्यवश आधुनिक सभ्यता की चक्काचोंद में भारतीय गौवंश की भारी उपेक्षा हो रही है एंव गौ-हत्याये हो रही है और गायों के संख्या भी बहुत कम हो गयी। 
परिणामत:देश में दुःख दारिद्रय का विस्तार हो रहा है,और लोगो में हिंसा,क्रोध लोभ एंव विलासिता बढ़ती जा रही है। 
आज के परिवेश में गौवंश के प्रति-धार्मिक एंव आध्यात्मिक चिंतन के साथ-साथ आर्थिक,सामाजिक तथा विज्ञानिक एंव स्वास्थ्य संबंधी चिंतन की आवश्यकता है। 
संत महात्मा,आचार्यो के श्री मुख से बहुत कुछ सुना था उन्ही में से गौ-गोविन्द की कृपा से टूटी फूटी वाणी में बोलने का दुष्साहस किया।भगवान से प्रार्थना है की प्रत्येक भारतीय गौमाता के प्रति अपना दायित्वे समजे और जीवन में उतारे। आशा है आप सभी पूज्ये महाराज श्री के श्री मुख से गौमाता की महिमा सुनकर गौ सेवा के प्रति प्रेरणा प्राप्त करेंगे। आप सेवा में लगकर दुसरो को भी प्रेरित करेंगे।इसी के साथ में अपनी वाणी को विराम देता हूँ। बोलने में कुछ गलती हुई हो तो आप सभी छोटा बच्चा समज कर माफ़ करे। 
धन्येवाद ,जय गौमाता जय गोपाल ,माँआआआ 

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