गौ हत्यारा कोन शायद हम (किसान)

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To the first time in the History of India. आज गाय के रहस्यमय कातिलों का पर्दाफाश किया जा रहा है।
प्रिय किसान भाइयों, जरा ध्यान से यह पढ़ना।
अब मैं आप सबको यह समझाऊँगा कि गौ हत्या का जिम्मेदार कौन हैं, और किसको गौ हत्या का पाप लगेगा?
जैसे एक आदमी की आदर्श उम्र 100 साल तथा अच्छे से काम धाम करने की उम्र 60 साल मानी गई है। ठीक ऐसे ही गाय की आदर्श उम्र 30 साल मानी गई हैं। वह 20 साल तक तो मनुष्य की तरह बीना किसी विशेष सेवा के आराम से जी सकती है। जैसे मनुष्य का 60 साल बाद बुढ़ापा आना शुरू हो जाता है वैसे ही गाय भी 20 साल बाद बुढ़ी होने लग जाती है।
एक गाँव में 100 परिवार रहते हैं। किसी के पास 1 गाय है, किसी दूसरे के पास 2 गाय हैं, किसी अन्य के पास तीन या चार भी हो सकती है। मानलो गाँव में सिर्फ 200 गाये हैं। यदि एक गाय दो साल में सिर्फ एक बच्चे को जन्म देती हैं तो 1 साल बाद 300 तथा 2 साल बाद 400 हो जाएगी। इसी तरीके से 10 साल बाद उस गाँव में कम से कम 1000-1200 गाये हो जाएगी। अब यदि इतनी गायों के लिए गाँव में गौशाला खोल भी लें तो इतनी गायों के लिए चारा कहाँ से आएगा? 
परंतु हकीकत में दस साल बाद भी गाँव में ज्यादा से ज्यादा 300 गाये हो सकती हैं। बाकी की गाये गई कहाँ ?
गाय या बैल खरीदने के लिए बाहर से व्यापारी बनकर गौ हत्यारे भोले-भाले किसानों के पास आते हैं। उन्होंने किसानों को यह कहकर बेवकूफ बनाया-“हमको दूध देती हुई गाय चाहिए।” अब ये व्यापारी या तो स्वयं कुछ दिनों तक इस गाय का दूध निकालकर कसाईयों को बैच देते हैं या फिर खरीदकर किसी दूसरे को बेच देते हैं। इस तरह से 7-8 महीने बाद वह गाय अपने-आप किसी ना किसी कसाई के पास पहुँच जाती हैं।
अतः इस बात की गाँठ बाँध ले कि किसी भी गाय या बैल को अपने खेत से बाहर नहीं जाने देंगे क्योंकि अब कहीं भी गौचर भूमि नहीं हैं तथा गौ शालाओं में आप सभी की गायों को खिलाने जीतना चारा नहीं हैं। गाय को किसी को बेचना , मतलब अपनी माँ को बेचना हैं। तथा गाय को अपने खेत से बाहर निकालना मतलब अपनी माँ को घर से बाहर निकालना हैं। 
दूध बेचने के चक्कर में बहुत सी गाय रखना तथा आवश्यकता पूरी होने पर गाय या बैल को खेत की दीवार से बाहर निकालना भी पाप हैं।
अतः गौ हत्या में बिलकुल भी भागीदार न बने। इस लेख को अधिक से अधिक लोगों के साथ share करके गौ सेवा का पुण्य कमाएँ।
निवेदक आपका प्यारा
गोवत्स राधेश्याम रावोरिया

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