‘गावो विश्वस्य मातरः’ रामसुखदास जी महाराज स्वामीजी

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‘गावो विश्वस्य मातरः’ रामसुखदास जी महाराज स्वामीजी 


‘गावो विश्वस्य मातरः’, संसारकी माता है गाय । जन्म देनेवाली माता तो बचपन में दूध पिलाती है और गाय तो पूरे जीवनभर दूध पिलाती है, मृत्यु समयमें भी गायका दहीं दिया जाता है । यह माँ भी है, दादी भी है , नानी, परनानी, परदादी भी है । सबको दूध पिलाती है । यह संपूर्ण संसारकी माँ है । गाय रक्षा करती है ।
एक जगह रात्रीको चोर आए तो गायने रस्सी तोड़कर उनके पीछे भागकर चोरोंकों भगा दिया । जैसे माँ रक्षा करें ऐसे रक्षा करती है, पालन करती है, प्यार, दुलार करती है ।गौ माताको याद करनेसे अंतःकरण निर्मल होता है । गायोकों खुजलानेसे असाध्य रोग भी ठीक हो जाते है, आप उचित समजो तो करके देख लो । गौकी रक्षा करनेसे अपनी रक्षा स्वाभाविक हो जाती है । आजकल लोगोनें गायका महत्व जानना बंद कर दिया है । गौके आशीर्वादसे लोक और परलोक दोनों सुधर जाते है । गौ माताकी कृपासे असंभव संभव हो जाता है । गायोंमें एक विलक्षण शक्ति होती है , उनको प्रसन्न, राजी किया जाय तो गौ सब तरहसे सुख देती है , सबकी रक्षा करती है । ईमानदारीसे गायोंकी रक्षाकी जाय तो उसके पालनमें कोई साधनमें कमी नहीं आएगी, आप हृदयसे करके देख लो । आप घरोमें एक-दो-दो गायें रखो तो सुगमतासे पालन हो जाय ! आजकल लोगोंकी भावना गायोंके प्रति कम हो गई है । गौ माता धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदान करती है । गौमूत्रसे बनी दवाईयोंसे बहुत फायदा होता है ।
जो गौका नुकसान करता है, उसका नुकसान होता है । अंग्रेज शासनके समयकी बात है, हिंदु-मुस्लिमकी लड़ाई हो रही थी तो कुछ मुस्लिम पहलवान शामको दंगा करके वापस जा रहे थे । उन्होने एक गायको पकड़ लिया और सोचाकी उसको मारकर पकाकर खाएँगे । तो एक पहलवानको पकडाकर मसाला लेने गए, पीछे उसको दया आयी तो गायको छोड़ दिया। पीछे उनलोगोंकों फाँसी हो गई तो रक्षा करनेवालेके पैरके नीचे गायके शिंग आ गए और उसकी रक्षा हो गई, यह सत्य घटना है ।
कल्याण अंकमें एक सत्य घटना प्रकाशित हुई थी ,एक हिसारका रहनेवाला ब्राह्मण था । बीकानेर जा रहा था, बीमार होनेसे चुरुमें रुक गया । उसने अपने भाईको चिट्ठी लिखी कि ज्यादा बीमार है, आप आ जाएँ । उनको रात्रीमें गौका स्वप्न आया कि तूने मुजे बचाया है, मैं तुजे बचाऊँगा ! उन्होनें एकबार कीचड़में फसी हुई गायकी जान बचाई थी ।बाद में उस सज्जनका स्वास्थ्य ठीक हो गया था ।
घरोंमेंसे साग-सब्जीके छिलके, आटेका छना हुआ कोरमा ऐसे खाद्य पदार्थ इकट्ठे करके गायोंकी सेवा करो तो कोई नया खर्चा भी न होकर सुगमतासे पालन हो जाएगा । हरा घासचारा दिया जाय, गुवार पानीमें मथकर दिया जाय, उसको गाय उत्साहसे खाती है । गौ किस तरहसे राजी हो, प्रसन्न हो ऐसा हृदयमें भाव रखना चाहिए । चीज तो सीमित होती है पर भाव असीम होता है । सेवासे कल्याण हो जाय । गाय बिक्री न करो, वरना कतलखाने चली जाएगी ! एक जगह हजोरों गायोंका पालन मुश्किल होता है पर सभी गृहस्थ एक-एक गायका पालन करें तो सुगमतासे गायकी रक्षा हो जाय । गायको सुई देकर दूध दोहना पाप है, ऐसा दूध नहीं पीना चाहिए । पहले ३६ करोड़ पशु थे, अभी गणना हुई तो १० करोड़ पशु बचे है । प्लास्टिकका उपयोग न करें । प्लास्टिक थेलियोमें बचा हुआ खानेका पदार्थ कूड़ेमें फेंकनेसे गायें खाकर मर जाती है, उनके पेटमेंसे १२-१३ किलो प्लास्टिकका कचड़ा निकला है ।अतः कागज, कपडेकी थेलीका प्रयोग करें । गायें दुःखपाकर मरती है तो प्लास्टिककी थेली बनानेवाले और प्रयोग करनेवाले पापके भागी होंगे ।
हिंदु और गौ पर आजकल बहुत आफत है, परिवार नियोजन मत कराओ । बच्चोंकों जन्म लेने दो, परिवार नियोजन करना पापकी बात है । गर्भपात निषेधके लिए तो विदेशमें भी कई संस्थायें काम करती है पर नसबंधीका विरोध नहीं करते है । जिस किसी तरहसे गाय और हिंदुओकी रक्षा करो वरना भारी नुकसान होगा । परिवार नियोजन करके मनुष्य पैदा नहीं हुए उस घाटेकी पूर्ति कभी नहीं होगी ।


दि। २८/१०/१९९८, प्रातः ८.३० बजेके प्रवचनसे

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