एक गाय ने पत्नी बन अपने ही पति को मार, लिया अपने खून का बदला!

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           –<( गौ कथा )>–
एक गाय ने पत्नी बन अपने ही  पति को मार, लिया अपने खून का  बदला!
पौराणिक कथाये
एक बार एक कृष्ण भक्त अपनी भक्ति में रत था, तभी उसने देखा के एक  गाय भागती हुई आ रही है और पीछे  पीछे उसका मालिक उसे पकड़ने के  लिए दौड़ रहा था. उस व्यक्ति ने उस गाय को पकड़ लिया और मालिक को  सौंप दिया, असल में गाय का मालिक  एक कसाई था जो उसे हलाल करने  वाला था तब मौका पाके गाय भाग गई  थी.
उस कसाई ने गाय को लाके उसको  हलाल कर दिया, मरती हुई गाय की  इतनी भयंकर हाय लगी की मारने  वाला कसाई अगले जन्म में कसाई  बना और वो गाय उसकी ही पत्नी बनी. जिस कृष्ण भक्त ने गाय को वापस  कसाई को पकड़ाया था वो भी एक कसाई  ही बना और अपने पिछले जन्म के  पुण्य कर्म भूल चूका था. वो राजा  के यंहा बकरा हलाल करने का काम  करता था, एक दिन राजा को पता नहीं क्या सूझी की उसने अपने कसाई को  बकरे को पीछे से काटने बोला न की  पहले उसका सर.
राजाज्ञा का पालन करते हुए कसाई  बकरे को उसके कमर के पीछे के भाग  से हलाल करने लगा, तब एक आवाज सुन कर वो चौंक गया. कसाई ने देखा की  बकरा कुछ बोल रहा है इंसानो की  जुबान में, बकरे ने कहा की अरे  कसाई तू ये क्या कर रहा है मैं  तुझे देख भी नहीं पा रहा हूँ की  तू मुझे कैसे मार रहा है. अगर मैं ऐसा न कर सका तो अगले जन्म में,  मैं तुझे वापस कैसे मारूंगा,  इतना सुनते ही कसाई का दिमाग  ठिकाने आ गया और वो वंही बैठ कर  भगवान से क्षमा मांगने लगा.
सुबह से शाम हो गई और कसाई भगवान  की साधना में बैठा रहा, शाम होने  पर जब उसकी आँख खुली तो उसे ये  एह्साह हुआ की राजा के पास बकरे  का मांस नहीं पहुंचा है और राजा  उसे मार डालेगा. जैसे तैसे वो  हिम्मत करके राजमहल गया, तो राजा उलटे उस पर प्रसन्न होगया और  बोला आज का गोश्त तो कमाल का था  तुम इनाम मांगो क्या चाहिए? ये  सुन कर कसाई जिसका नाम सदन था  बोला महाराज मैंने तो बकरा हलाल  ही नहीं किया जो कोई भी आप के पास मांस पहुँचाने आया था वो और कोई  नहीं भगवान कृष्ण थे.
उसी दिन से सदन भगवान की भक्ति  में लग गया और जगन्नाथ पूरी के  लिए रवाना हो गया, रस्ते में वो  विश्राम करने उसी कसाई के घर  रुका जिसे पिछले जन्म में भागती  हुई गाय पकड़ाई थी और गाय उस कसाई  की पत्नी बनके जन्मी थी. अपने  समाज के व्यक्ति होने के कारण  उसे आदर मिला और रात में विश्राम की जगह, सदन कसाई रूपवान था और  कसाई की पत्नी उसपे रीझ गई.
पति के सोने के बाद कसाई की  पत्नी सदन के पास आई और उसके साथ  हमबिस्तर होने की बात रखी, पर  सदन ने मना कर दिया. कसाई की  पत्नी को लगा के शायद उसके पति  के डर से सदन मना कर रहा है तो वो अंदर गई और अपने पति को सोये हुए  ही हलाल कर दिया. ऐसा करके वो  वापस आई और उसने कहा की तुम्हे  अब मेरे पति से डरने की जरुरत  नहीं है मैं उसे मार आई हूँ, इस  पर भी सदन ने मना कर दिया तो कसाई की पत्नी ने हल्ला मचा दिया और  सदन पर आरोप लगा दिया की उसने ही  उसके पति को मार डाला है.
सजा में सदन को दोनों हाथ गंवाने पड़े और कटे हुए हाथो से ही वो  जगन्नाथ धाम के लिए रवाना हो  गया, जन्हा भक्ति से प्रसन्न होक भगवान ने उसके दोनों हाथ फिर से  लौटा दिए और उसे पिछले जन्म की  कथा बता कर गौ हत्या के भागी  होने का भी बोध कराया….

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