देसी गाय विदेशीसे श्रेष्ठ क्यों ? भाग -२

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देसी गाय विदेशीसे श्रेष्ठ क्यों ? भाग -२

यह जाननेके लिए दोनोंके बारेमें जानना होगा !
  • क्या गाय मात्र एक सामान्य प्राणी है ?
उत्तर- नहीं ! गाय मात्र एक सामान्य प्राणी नहीं अपितु विशिष्ट एवं सात्त्विक प्राणी है । गाय ब्रह्मांड संचालक सूर्यनारायणकी प्रतिनिधि है । इसका अवतरण पृथ्वीपर प्रकृतिके संतुलनको बनाए रखने हेतु हुआ है । पृथ्वीपर जितनी भी योनियां हैं, उन सबका पालन-पोषण करने हेतु गौमाताने अवतार लिया है । इस संबंधमें विस्तृत वर्णन ऋगवेदके २८ वें अध्यायमें पढा जा सकता है ।
  • “गौमाता”(देसी गाय) और “विदेशी गाय” माने जानेवाले पशुमें अंतर कैसे पहचानें ?
उत्तर – देसी एवं विदेशी गायमें अंतर करना अत्यंत सरल है ।
१.      देसी गायमें ककुद् (अर्थात् पीठपर ऊपरकी और उठा हुआ कुबड, जिसमें सूर्यकेतु नाडी होती है)होता है, विदेशीमें यह नहीं होता है, उसकी पीठ सपाट होती है ।
२.      देसी गायका गल-कंबल(गलेके नीचे की त्वचा जो लटकती रहती है) होता है जबकि विदेशीमें गल-कंबल कसा हुआ होता है ।
३.      तीसरा अंतर होता है देसी गायके सिंग जो कि सामान्यसे लेकर बडे आकारके होते हैं । जबकि विदेशीके सिंग या तो होते ही नहीं है अत्यंत छोटे होते हैं ।
४.      देसी और विदेशीमें त्वचाका भी अंतर होता है अर्थात् गौमाता की त्वचा फैली हुई, ढीली एवं अतिसंवेदनशील होती है, जबकि विदेशीकी त्वचा काफी संकुचित एवं कम संवेदनशील होती है
  • क्या भारतमें पाई जानेवाली सभी गायें देसी हैं ?
उत्तर-भारतमें पाई जानेवाली सभी गायें देसी होते हुए भी देसी नहीं हैं । विगत कई दशकोंसे विभिन्न सरकारोंद्वारा चलाए गए “नस्ल-सुधार” कार्यक्रमने देसी गायोंकी प्रजाति(नस्ल) को अशुद्ध कर दिया है । अधिक दूधके लोभमें अथवा अज्ञानमें पशुपालकोंने भी इस तथ्यपर ध्यान नहीं दिया और इसका दुष्परिणाम वर्ण-संकर नस्लके रूपमें सामने है । शुद्ध देसी गायकी एक  विशिष्ट पहचान है “उसकी पूंछ” । जिस गायकी पूंछका बाल भूमिको स्पर्श कर रहा हो वह उतनी ही शुद्ध होती है; अतः देसी गायकी प्रजातियोंका अर्थात् गौ संरक्षण एवं संवर्द्धन और भी आवश्यक हो जाता है ।
  • प्रश्न – क्या गौमूत्रका सभी व्यक्ति पान कर सकते हैं ?
उत्तर- जी हां ! गौमूत्रका सेवन सभी व्यक्ति कर सकते हैं; किन्तु मांसाहारी व्यक्तिको गौमूत्र नहीं लेना चाहिए । यदि लेना हो तो गौमूत्र लेनेके १५ दिनों पूर्वसे मांसाहारका त्याग कर देना चाहिए । पांडुरोगके( पीलिया)  रोगीको भी गौमूत्रका सेवन नहीं करना चाहिए । देर रात्रिमें गौमूत्र नहीं लेना चाहिए । ग्रीष्म ऋतुमें गौमूत्र कम मात्रामें लेना  चाहिए । गौमूत्र कपडेकी आठ परतोंमें छान कर लेना चाहिए अथवा गौमूत्र अर्क लेना चाहिए ।
  • प्रश्न-किन पदार्थोंके साथ गौमूत्र लेना चाहिए ।
उत्तर- गौमूत्र किसी भी प्रकृतिक औषधिके साथ मिलकर उसके गुण-धर्मको बीस गुणा बढा देता है । गौमूत्र गुड और मधु(शहद) के साथ लेना अत्यंत लाभदायक है ।

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