गाय के दूध और दुग्ध पदार्थों से स्वास्थ्यकारी व्यंजन और खाद्य पदार्थ बनाये जाते हैं । गो पदार्थ, कैंसर, तनाव, उच्च रक्त चाप, मधुमेह, हृदय रोग, स्नायुरोग, मनोरोग, चर्मरोग, कान, नाक, दंत रोंगों, ज्वर, सर्दी, केश क्षरण के उपचार में प्रभावी होते हैं । इनका उपयोग साबुन, शैंपू और सौंदर्य प्रसाधनों और सामग्री में हो सकता है । यह कृषि में सहायक हैं और खाद तथा कीटनियंत्रक देते हैं । गोबर से हम रसोई गैस और बिजली बना सकते हैं ।


गो उद्यम यथार्थ पूर्ण है :

गोबर गैस

भारत दूध उत्पदन में अग्रणी है । १९९७-९८ में भारत में ७.५ करोड़ टन दूध का उत्पादन हुआ । इसका ८०% छोटे किसानों से आया ।
दक्षिण भारत में कोलार की एस.के.जी. सोसायटी ने ७५,००० गोबर गैस संयंत्र लगये हैं ।
कैलिफोर्निया (अमेरिका) में बग जोन्स नामक वैज्ञानिक ने इनलैंड एनर्जी कोर्पोरेषन की स्थापना की, जो प्रतिदिन आसपास के क्षेत्र से १५०० टन गोबर जुटाकर ५० मेगावाट विद्युत उत्पादन करते हैं ।
गुजरात सरकार गोमूत्र ३ रू. और गोबर २ रू. प्रति किलोग्राम की दर से ख्ररीदती है ।

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