गौ – चिकित्सा जेर ( झर )

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गौ – चिकित्सा जेर ( झर )

                 गाय, भैंस की जेर ( झर ) न गिरना ।
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              गाय – भैंस प्रसव ( डिलिवरी ) के बाद ६-७ घन्टे बाद अपने आप जेर को बाहर डाल देती है । कमज़ोर मादा पशु की जेर कभी – कभी देर में भी गिरती है और जेर कुछ समय बाद सड़ने लगती है ।
             जेर न गिरने तक , रोगी मादा पशु , सुस्त बेचैनी रहती है । चारा – दाना ठीक से नहीं खाती । उसकी योनि में से दुर्गन्ध आती है । पेशाब बार- बार और थोड़ा – थोड़ा आता है । कभी जेर छोटे- छोटे टुकड़ों में गिरती है ।
१ – औषधि – फेफर की छाल ९६० ग्राम , गुड़ २४० ग्राम , अजवायन ६० ग्राम , पानी २८८० , सबको बारीक पीसकर , पानी के साथ उबालें । आधा पानी रह जाय तो उसे छानकर रोगी पशु को , दोनों समय , अच्छा होने तक ,पिलाया जायँ ।

२ – औषधि – अलसी या तिल्ली का तैल ४८० ग्राम , अजवायन २४ ग्राम , अजवायन को बारीक पीसकर , तैल में मिलाकर , गरम कर गुनगुना ही रोगी मादा पशु को चार दिन तक एक समय पिलाने से जेर गिर जाया करती है ।

३ – औषधि – अश्वगन्धा ६० ग्राम , अजवायन १२० ग्राम , बाँस की पत्ती १८० ग्राम , गाय का दूध १६० ग्राम , गुड़ २४० ग्राम , अदरक २४ ग्राम , सबको बारीक पीसकर , दूध को उबाल लें । फिर छानकर गुनगुना ही रोगी पशु को , दोनों समय , अच्छा होने तक , पिलायें ।

आलोक -:- काढ़े को उतारने के बाद गुड़ को बारीक पीसकर डाला जायँ ।वरना दूध फट जायेगा ।

४ – औषधि – अदरक २४ ग्राम , इन्द्रायण फल ९ ग्राम , अजवायन १२० ग्राम , गुड़ २४० ग्राम , पानी २ लीटर , सबको पीसकर के रोगी मादा पशु को , दोनों समय ८ दिन तक बोतल द्वारा पिलाया जाय तो जेर गिर जायगी ।
टोटका -:-
५ – औषधि – रोगी मादा पशु को गूलर के फल ८० ० ग्राम , चलनी में रखकर खिलाने से भी जेर गिर जाती है ।

६ – औषधि – रोगी मादा पशु को गन्ने  की पत्तियाँ खिलाने से भी जेर बाहर आ जाती है ।

७ – औषधि – नीम की पत्ती उबालकर , पानी ठंडा होने पर , योनि – मार्ग को धोना चाहिए ।

८ – औषधि – पशु की योनि को एनिमा से धोना चाहिए । उससे पीप बाहर निकल जायगा और पशु को जल्दी आराम होगा ।

आलोक -:- जब पशु ने जेर न गिरायी न हो तो उसमें गोबर लगा देने से गाय जेर को नहीं खाती तथा रात में जागना भी नहीं पड़ता । जब पशु ने जेर न गिरायी हो तो पशु को ऐसे कोने में खूँटा गाड़कर बाँधना चाहिए कि मादा पशु घूम न सके और जेर को खा न सकें । 

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