गौ माता की करूण कहानी गौ माता की जुबानी

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प्यारे भारत वासियों।

भारत एक ऎसा देश है जहाँ मेरे उत्थान और विकास की बातें आदि काल से होती आई है। ऋषि मुनियों की पंरम्पराऒ को आत्मसात करने वाले इस देश में मुझे माता और पूज्य की संज्ञा दी जाती है। गौमाता, कामधेनु, सुरभि इत्यादि मेरे ही नाम हैं । सभी जानते हैं कि देव दानवों द्वारा किये गये सागर मंथन से मेरा जन्म हुआ, देवताओं द्वारा मैं पूजित हुई और ऋषि मुनियों द्वारा पालित और पोषित हुई।
सृष्टि के निर्माता भगवान विष्णु ने कृष्ण अवतार लेकर मेरी सेवा की, इस कारण वो गोपाल और गोविंद कहलाये । असंख्य लोगो ने मेरी रक्षार्थ बलिदान दिये। ग्रन्थ और पुराणों की मै विषय वस्तु बनी। मै मनुष्य के जन्म से लेकर आज तक निरन्तर प्राणीमात्र की सेवा ही करती हूँ। आप लोगो की इतनी सेवा के वाबजूद मुझे आज मनुष्य ने दिया ही क्या है।

मुझे खाने के लिये घास चारा नहीं मिलता। भूख और प्यास से ग्रस्त जीवन काट रही हूँ। जब मेरी क्षुधा शान्त नहीं होती तब मै दर दर भटकती हूँ कभी इस दर तो कभी उस दर, कभी मै सब्जी मंण्डी में डंडे खाती हूँ। मुझे जब प्यास लगती है तो मैं मानव मूत्रालय में जाकर गन्दा पानी पीती हूँ। पॊलीथीन की थैलियाँ भी खाती रहती हूँ । आप सब पॊलीथीन सडक पर फैक देते हो और मैं मजबूरी में उन्हे खाती हूँ।
हे मनुष्यों मै तुम्हे धन देती हूँ, मेरा बछड़ा तुम्हे अन्न देता है। हे संवेदनशील इन्सानों, दुनिया में ऐसी कौन सी माँ है जिसके दौनों पैर बाँध दिये जाते है। उसके सामने उसके बच्चे को रस्सी से बाँध दिया जाता है फिर मेरा दूध निकाला जाता है। कई लोग तो मेरी काया में निर्दयतापूर्वक इंजेक्शन चुभो कर मेरा दूध निकाल लेते हैं।

कई बार तो मेरे बछडे को भी दूध नहीं मिल पाता लेकिन मै तुम्हारा पेट भरती हूँ। जब मेरा दूध बन्द हो जाता है और मेरा बछडा बैल बन कर बूडा हो जाता है तब तुम लोग हमें कसाईयों को बेच देते हो। मै कत्लखानों में कसाइयों के सम्मुख ठेल दी जाती हूँ। चार दिनों तक मुझे भूखा रखा जाता है ताकि मेरा हीमोग्लोबिन गलकर माँस से चिपक जाये। फिर मुझे घसीट कर लाया जाता है क्योंकि मै मूर्छित रहती हूँ। मुझ पर 200 डिग्री सेल्सियस वाष्प में उबलता हुआ पानी डाला जाता है। मै तड़प उठती हूँ। हे मेरा दूध पीने वालों, मै तुम्हे याद करती हूँ। मुझे कठोरता से पीटा जाता है ताकि मेरा चमडा आसानी से उतर जाये। मेरी दौनो टाँगे बाँध कर मुझे उल्टा लटका दिया जाता है। फिर मेरे बदन से सारा चमडा निकाल लिया जाता है। सुनो जीवधारियों, अभी भी मैने प्राण नहीं त्यागे हैं। मै कातर निगाहों से देखती हूँ, शायद इन कसाइयों के मन में मनुष्यता का जन्म हो। किन्तु इस समय मुझसे पोषित होने वाला कोई भी मानव मुझे बचाने नहीं आता। मेरे चमड़े की चाहत रखने वाले दुष्ट कसाई मेरी जीवित अवस्था में ही मेरा चमड़ा उतार लेते है और तड़प कर मै प्राण त्याग देती हूँ।

सुनो धर्मप्राण मनुष्यो, राम, कृष्ण,नानक महावीर की जय जय कार करने वालों के देश में मेरी करुण पुकार सुनने वाला कोई नहीं है। मुझे तो बस एक बात का समाधान चाहिये तुमने मेरा दूध पिया है मेरा बछड़ा कन्धे पर हल खींचता है, गाडी खींचता है, कोड़े खाता है। हमें कीलें चुभोई जाती हैं, फिर भी हम तुम्हारे घर दूध,अन्न, फल और सब्ज़ियाँ पहुँचाते हैं। मै और मेरा बेटा तुम्हें चमड़ा माँस हड्डियाँ दूध सब कुछ तुम्हे देते है। आज जो शहर बसे हुऐ हो, वो सब मेरे ही नाम की गोचर और गौ चारण भूमि पर बसे हुये हैं। सच कहूँ तो मेरी इस भूमि पर भूमाफिया और गन्दे राजनेता ओं ने कब्जा किया हुआ है। शास्त्र कहते हैं गोचर भूमि पर कब्जा करने वाले पातक होते हैं, इस पाप से मुक्ति का शास्त्रों में कोई विधान है ही नहीं। मेरी भूमि पर कब्जा कर लिया है तभी तो मै शहरों में आयी हूँ और वहाँ से भी मुझे बेदखल किया जा रहा है। इस पावन और पवित्र भारत भूमि पर ऐसा कोई नहीं है क्या जो धर्म और कानून का पालन कर मेरे प्राण बचाये। तुम्हारे द्वारा किये गये क्रूरतम हत्याचारों को सहकर भी मै तुम्हे श्राप नहीं दे सकती क्योंकि मै माँ हूँ ना। मैने अपना कर्तव्य निभाया व और परमेश्वर तुम्हे शक्ति दे कि तुम भी अपना कर्तव्य निभाओ ।

गाय माता की करुण पुकार:-

“ए हिंद देश के लोगों, सुन लो मेरी दर्द कहानी।
क्यों दया धर्म विसराया, क्यों दुनिया हुई वीरानी !!
जब सबको दूध पिलाया, मैं गौ माता कहलाई,
क्या है अपराध हमारा, जो काटे आज कसाई।
बस भीख प्राण की दे दो, मै द्वार तिहारे आई
मैं सबसे निर्बल प्राणी, मत करो आज मनमानी॥
जब जाउँ कसाईखाने, चाबुक से पीटी जाती,
उस उबले जल को तनपर, मैं सहन नहीं कर पाती।
जब यंत्र मौत का आता, मेरी रुह तककम्प जाती,
मेरा कोई साथ न देता, यहाँ सब की प्रीत पहचानी॥
उस समदृष्टि सृष्टि नें, क्यों हमें मूक बनाया
न हाथ दिए लड़नें को, हिन्दु भी हुआ पराया।
कोई मोहन बन जाओ रे, जिसने मोहे कंठ लगाया,
मैं फर्ज़ निभाउँ माँ का, दूँ जग को ममता निशानी॥
मैं माँ बन दूध पिलाती, तुम माँ का माँस बिकाते,
क्यों जननी के चमड़े से, तुम पैसा आज कमाते।
मेरे बछड़े अन्न उपजाते, पर तुम सब दया न लाते,
गौ हत्या बंद करो रे, रहने दो वंश निशानी ।

हे हिंदू वीरो, आपकी गौ माँ आपकी तरफ अश्रुपूर्ण नयनों से निहार रही है।

आपकी माँ
सुरभि

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