ब्रह्मलीन श्रद्धेय स्वामी श्रीशरणानन्दजी महाराज के श्री मुख से गौमहिमा

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🌺गाय सारे राष्ट्र व🌺                🌺विश्व की माता है🌺
   ब्रह्मलीन श्रद्धेय स्वामी     श्रीशरणानन्दजी महाराज
१. हार्दिक इच्छा है कि कोई घर ऐसा न हो, जिसमें गाय न हो; गाय का दूध न हो। हर घर में गाय हो और गाय का दूध पीने को मिलना चाहिये। गाय ने मानवबुद्धि की रक्षा की है।
२.बेईमानीका समर्थन करना और उससे एक-दूसरेपर अधिकार जमाना, यह बढ़ता जा रहा है । इसका कारण है कि बुद्धि सात्विक नहीं है, बुद्धि सात्विक क्यों नहीं? कारण मन सात्विक नहीं है । मन सात्विक क्यों नहीं? कारण शरीर सात्विक नहीं है। शरीर सात्विक नहीं है, तो इसका कारण? आहार सात्विक नहीं है।
३.मैं आपसे निवेदन करना चाहता था कि सचमुच जितना आपलोग गाय के सम्बन्धमें जानते हैं, उसका हजारवाँ हिस्सा भी मैं नहीं जानता हूँ, लेकिन क्या सचमुच आपलोग गाय के साथ मातृ-सम्बन्ध जोड़नेके लिए राजी हैं? अगर हाँ, तो हमारा बेड़ा पार हो जायगा।
४.जो लोग सेवा करना चाहते हैं–वे कैसे हैं, इस बातपर जोर डालिये। समाज क्या करता है, राज्य क्या करता है, कुछ लोग देते हैं कि नहीं, वह गौण है। मुख्य बात यह है कि अपने दिलमें गायके प्रति पीड़ा होती है कि नहीं?
५.गाय हमारी ही नहीं, मानवसमाजकी माँ है, सारे राष्ट्रकी और सारे विश्वकी माँ है। गायकी रक्षा होती है तभी प्रकृति भी अनुकूल होती है, भूमि भी अनुकूल होती है। गायकी सेवा होनेसे भूमिकी सेवा होती है और भूमि स्वयं रत्न देने लगती है।
६.जैसे-जैसे आप गोसेवा करते जायँगे, वैसे-वैसे आपको यह मालूम होता जायगा कि गाय आपकी सेवा कर रही है। आपको यह लगेगा कि आप गाय कि सेवा कर रहे हैं तो गाय हर तरह से स्वास्थ्य की दृष्टिसे, बौद्धिक दृष्टिसे, धार्मिक दृष्टिसे आपकी सेवा कर रही है।
७.हम सच्चे सेवक होंगे तो हमारी सेवा होगी, हमारी सेवाका मतलब मानवजातिकी सेवा होगी, मानवमात्रकी सेवासे ही सब कुछ हो सकता है। मानव जब सुधरता है तो सब कुछ सुधरता है और मानव जब बिगड़ता है तो सब कुछ बिगड़ जाता है।
  (कल्याण भाग 84 पृष्ठ 638 से) जय गोमाता…

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