रामस्नेही धर्म की आचार संहिता

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रामस्नेही धर्म की आचार संहिता १. सर्व व्यापी श्री राम जी महाराज का ईष्ट रखना।२. संत वाणी, वेद-पुराण स्मृति ,गीता ,भागवत आदि पुराणो को मानना व स्वाध्याय करना एंव घर में रखना।३. प्रात:सांय काल संध्या वन्दन ,आरती व ज्यादा से ज्यादा नाम जप करना चाहिए।४.नित्ये माता-पिता एंव गुरु चरणो में प्रणाम नमस्कार करना।५. गुरु मंत्र […]

।।दरियाव जी महाराज की लावणी।।

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।।दरियाव जी महाराज की लावणी।। प्रगट भये दरियासा दाता, जाण कलियुग में विख्याता।।भरतखण्ड मरुधर के मांही, शहर एक जैतारण जांही।जनम धर अवनि पर आये, गगन सुर पुष्पन झड़ लाये।सत्रह सौ तैतीस का, जन्म अष्टमी जाण ।प्रगट भये दरियावजी,रोप्या भक्ति निशाना ।धिन है वांके पितु माता ।।1।। एक दिन पलणे पौढाये, नागेश्वर दर्शन को आये।भान उदय […]

सुमिरण का अंग श्री दरियाव दिव्य वाणी जी

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दरिया सुमिरै राम को ,कोट कर्म की हान ।जम और काल का भय मिटै, ना काहु की कान।।परमात्मा के भजन में आनंद के साथ ही साथ दूसरे भी बहुत लाभहै । नामजाप करते समय अखंड आनंद का अनुभव तो होता ही है परंतुसाथ ही करोडों ही कर्म भी क्षय अवस्था को प्राप्त हो जाते है […]

श्री राम और राममन्त्र : तात्पर्य

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श्री राम और राममन्त्र : तात्पर्य————————- वास्तव में राम अनादि ब्रह्म ही हैं। अनेकानेक संतों ने निर्गुण राम को अपने आराध्य रूप में प्रतिष्ठित किया है। राम नाम के इस अत्यंत प्रभावी एवं विलक्षण दिव्य बीज मंत्र को सगुणोपासक मनुष्यों में प्रतिष्ठित करने के लिए दाशरथि राम का पृथ्वी पर अवतरण हुआ है। कबीरदास जी […]

जो सुमुरूँ तौ पूरन राम

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जो सुमुरूँ तौ पूरन राम,अगम अपार, पार नहिं जाको, है सब संतनका बिसराम।कोटि बिस्नु जाके अगवानी, संख चक्र सत सारँगपानी॥कोटि कारकुन बिधि कर्मधार, परजापति मुनि बहु बिस्तार।कोटि काल संकर कोतवाल, भैरव दुर्गा धरम बिचार॥अनंत संत ठाढ़े दरबार, आठ सिधि नौ निधि द्वारपाल।कोटि बेद जाको जस गावैं, विद्या कोति जाको पार न पावैं॥कोटि अकास जाके भवन […]