6 thoughts on “Contact Us

  1. very good message of gomatha of cows they give milk to all the people born baby to young and old man and woman

    by J.P.NARAYAN

  2. I wish the richest of the rich in the Hindu community come forward and give their utmost to saving cows and turning back India into Bharat- what it was. They should listen to their blood and do the right thing.You have only one life. Do this and rest in peace forever.

  3. हमने एक संस्था की सुरुआत की ह गौ माता की रक्षा के लिए सेवा के लिए तो आप लोग भी अपने विचार बताये के हमें क्या करना चाहिए

  4. देश भर के सच्चे गौभक्त मित्रो — इस वक्त मानव जाति के स्वयं के कल्याण हेतु, विश्व की रक्षा हेतु, पर्यावरण के बचाव के लिये, विश्व को दिशा देने हेतु, यग्य संस्कृति को बनाये रखने हेतु तथा समग्र, अक्षय विकास के लिये गाय ,गौवंश के संवर्धन की नितान्त आवश्यकता है ।गायों की प्रचूरता के कारण ही भारतभूमि यज्ञभूमि बनी है, गो-विज्ञान को पुन: जागृत कर जन -जन में प्रचारित करने की अनिवार्यता है । गो आधारित संस्कृति के विकास के लिये गो-केन्द्रित जीवन पद्धति को विकसित करना होगा । प्रत्येक घर में गाय का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक है । गाय के सान्निध्य मात्र से ही जीवन शरीर, मन, बुद्धि के साथ ही आध्यात्मिक स्तर पर पवित्र व शुद्ध हो जायेगा । प्रतिदिन कटती लाखों गायों के अभिशाप से बचने के लिये शासन पर दबाव डालकर गो-हत्या बंदी करवाने का प्रयास तो आवश्यक है ही किन्तु उससे भी बडी आवश्यकता है प्रत्येक के दैनंदिन जीवन में गाय प्रमुख अंग हो । घर – घर में गौपालन हो । अपने हाथ से गोसेवा करने का सौभाग्य हर परिवार को प्राप्त हो । प्रत्यक्ष जिनके भाग्य में यह गोसेवा नहीं वे रोज गोमाता का दर्शन तो करें । मन ही मन पूजन, प्रार्थना करें व प्रतिदिन अपनी आय का कुछ भाग इस हेतु दान करें । किसी ना किसी रूप में गाय हमारे प्रतिदिन के चिंतन, मनन व कार्य का हिस्सा बनें । यही मानवता की रक्षा का एकमात्र उपाय है । क्या आप भारत प्रेमी हमारी बातो से सहमत है तो ! लगायें मुहर। इसी सर्वजन हितकारी विषय पर हम दिल्ली में एक वृहद गौरक्षा आन्दोलन 8 सितम्बर को जंतर – मंतर पर आयोजित किये है। जहां देश भर के गौभक्त, गौ विषयक विद्वान, बड़े – बड़े जगद्गुरु, महामण्डलेस्वर, संत महंत, हमारे जैसे गौचरणो के दास भी सामिल होंगे, और एक वीशाल मंच से गौ भक्त मीडिया के माध्यम से देश की सरकार और गौ हत्यारों को एक सन्देश देंगे की इस पवित्र ऋषि – मुनियों के देव भूमि में हम गौहत्या नहीं होने देंगे।गौ हत्यारों को देश छोड़ कर जाना ही होगा नहीं तो गौहत्या से करे तोबा ..जो लोग जुड़ना चाहे या किसी प्रकार की सहायता कर सकते है। कृप्या अपना नाम और पता संगठन का नाम इस न ० पर मैसेज करे।09440516888 या मेल करे nayal1970@gmail.com पर निवेदक —” नयाल सनातनी” संस्थापक सचीव ”सर्वदलीय गौरक्षा मंच”

  5. DEAR FRIENDS,

    GORAKSHYA ,GOPOOJA AND GOSEVA….IS OUR PRIME MISSION ……MEANS
    • preserve and protect various pure, indigenous breeds of cattle, particularly ones that are currently endangered.
    • improve milk yield of cows and productivity of oxen of indigenous breeds of cattle by natural, traditional and effective means through:

    • Enhanced quality of nutrition.
    • Proper natural breeding policies to obtain strong and improved progeny (avoiding all artificial techniques of procreation)
    • Proper disease prevention and control systems.
    • Providing an atmosphere of love and care for the cows and bulls.
    maintain and supply a herd of good, potent indigenous bulls for the purpose of procreating improved progeny.
    perform, co-ordinate, fund and publicize research in the following areas

    • Traditional and new uses of the products of the cow viz., urine, dung, milk and milk derivatives in the areas of agriculture, health and nutrition, small power generation, hygiene and sanitation, etc.
    • Traditional and new uses of ox-power in the area of agriculture, transport, cottage industry and domestic life.
    assist villagers and rural communities by:

    • procuring and supplying cows and bulls to them.
    • funding land and housing for cattle, caretakers, fodder, etc.
    • educating and training them in the proper principles of animal husbandry.
    Establish and widely publicize the enormous economic utility (and how to enhance it) of the cow and bull in the life of the Indian villagers and for the nation as a whole.

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