छन्द – धन धन गोपाला हे नंदलाला गौ कारण जग आयो। सुन हे बनवारी बिनय हमारी गौ को नहिं बिसरायो। धरिके नररूपा हे सुरभूपा गौ चारन बनमाली। जेहि सृष्टि बनाई वही गौ माई दीन्हि सीख गौपाली। का करूँ प्रसंसा मानस हंसा गोकुल तारन आयो। तू अबिकारी जनमनहारी धनि धनि जो हियँ लायो। नंद जसोदा दीन्हि बिनोदा तप केवल गौ सेवा। यह दास तुम्हारो आन पधारो सरन गोपाल को लेवा।  अर्थ – हे गोपाल अब सुन लो, हे नन्दलाला आप गौ के लिए आए हो। हमारी यह विनती है। हे बनवारी सुनो गौ को मत भूलो। हे देवताओं के राज़ा आपने नर रूप धारण किया। हे वनमाली गौ चराने आये हो। जिसने सृष्टि बनाई वही गौ माता है। गौ सेवा की सीख दी है। हे प्रभु क्या प्रसंशा करूँ आप मन सरोवर के हंस आप गोकुल को तारने आए हो। आप अबिकारी हैं। अपने जनो के मन को हरण करने वाले हो, वे लोग धन्य है जिन्होंने आपको अपने हृदय में बिठाया है। नन्द और यशोदा को आपने विनोद दिया, उनकी तपस्या गौ सेवा है। हे प्रभु, आपका यह दास है आकर कृपा करो गोपाल को शरण ले लो।                    धेनु मानस

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