गावो विश्वस्य मातर: भाग -1

— गावो विश्वस्य मातरः भाग 1–

नित्य गोलोकधाम में एक समय की बात है भगवान श्याम सुन्दर नित्य गोलोक में रास विलास (नृत्य ) कर रहे थे ,नृत्य करते करते ठाकुर जी थोडा श्रमित हो गए और जब ठाकुर जी श्री जी थोडा श्रमित हो गए तो सुन्दर कल्पवृक्ष के नीचे बैठ कर  ठाकुर जी विश्राम करने लगे,असंख्य गोपियाँ  ठाकुर जी को घेरे हुए है उस समय  ठाकुर जी को इक्षा हुई दुग्ध पान की तो उस समय श्री  ठाकुर जी ने बड़े प्रेम से राधा रानी की ओर देखा और राधा रानी ने  ठाकुर जी को देखा दोनों युगल एक दुसरे को प्रेम से निहारने लगे और इस अवलोकन में उनसे प्रेम का एक प्रकाश निकला जो एक सवत्सा गौ के रूप में प्रकट हुआ.

विशेष ->  *–राधा कृष्ण का प्रेम ही गौ माता के रूप में प्रकट हुआ –*

वह सुरभि गौ माँ थी जिसके साथ एक बछड़ा भी था उस बछड़े का नाम था “मनोरथ”.

विशेष -> “मनोरथ” नाम क्यों ठाकुर जी का मनोरथ था दूध पीने का इसलिए वह मनोरथ नाम का वत्स प्रकट हो गया.

उस बछड़े को गौ दूध पिला रही थी.ठाकुर जी के श्रीदामा नामक गोप ने प्रसन्न होकर सोने की दोहनी में दूध दुहा और दूध दोह कर के ठाकुर जी ने और राधा रानी ने पिया , ठाकुर जी के हाथ से वह दूध का भांड गिरा,और उस अनंत गोलोक से धरती पर गिरा और जहा गिरा वहा फूटते ही समुद्र बन गया.और उस समुद्र का नाम हुआ “क्षीरसागर” दूध का समुद्र..

— अब ये जो दूध का समुद्र प्रकट हुआ है ये भगवान का बनाया हुआ बड़ा टंका है और वही से जितनी माताए है सबमे दूध की सप्लाई हो रही है ..दुनियाभर की माताओं में जो दूध आ रहा है वो वही क्षीरसागर से आ रहा है ..क्रमशः..

#जयश्रीसीताराम

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