गौ – महिमा (गोबर,गोमय/cow dung)

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१. अग्रंमग्रं चरंतीना, औषधिना रसवने ।  तासां ऋषभपत्नीना, पवित्रकायशोधनम् ।।  यन्मे रोगांश्चशोकांश्च , पांप में हर गोमय ।  अर्थात- वन में अनेक औषधि के रस का भक्षण करने वाली गाय ,उसका पवित्र और शरीर शोधन करने वाला गोबर ।तुम मेरे रोग औरमानसिक शोक और ताप का नाश करो ।  २. गोमय वसते लक्ष्मी – वेदों […]