गौ – महिमा (गोबर,गोमय/cow dung)

१. अग्रंमग्रं चरंतीना, औषधिना रसवने ।  तासां ऋषभपत्नीना, पवित्रकायशोधनम् ।।  यन्मे रोगांश्चशोकांश्च , पांप में हर गोमय ।  अर्थात- वन में अनेक औषधि के रस का भक्षण करने वाली गाय ,उसका पवित्र और शरीर शोधन करने वाला गोबर ।तुम मेरे रोग औरमानसिक शोक और ताप का नाश करो ।  २. गोमय वसते लक्ष्मी – वेदों में कहा गया है कि गाय के गोबर लक्ष्मी का वास होता है ।गोमय गाय के गोबर रस को कहते है ।यह कसैला एंव कड़वा होता है तथा कफजन्य रोगों में प्रभावशाली है ।गोबर को अन्य नाम भी है गोविन्द,गोशकृत,गोपुरीषम्,गोविष्ठा,गोमल आदि।  ३. गोबर गणेश की प्रथम पुजा होती है और वह शुभ होता है ।मांगलिक… Read More

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