गौ सेवा में थोङा लगा ले प्राणी ध्यान रे॥

॥ श्री गोमाता भजन ॥ गौ सेवा में थोङा लगा ले प्राणी ध्यान रे॥ झूठी जग की माया प्रभु का ही सच्चा नाम। गौ माता की सेवा ही सबसे बढ़कर काम है। गौ माता की सेवा से खुश होते भगवान रे॥ गौ सेवा में थोङा लगा ले प्राणी ध्यान रे…. मोटर बग्घी बंगला न साथ तेरे जा पाएँगे। सखा भ्रात सुत नाती इस धन को व्यर्थ गवाएंगे। इस दौलत को प्यारे तूँ क्यों करता बेकार रे॥ गौ सेवा में थोङा लगा ले प्राणी ध्यान रे…. न साथ में कुछ तूँ लाया, न साथ में कुछ ले जायेगा। मुट्ठी बांधे आया है ओर हाथ पसारे जायेगा। पूंछ पकङकर गौ की कर… Read More

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हे गोमाता, तुम्हें प्रणाम ! (भजन)

हे गोमाता, तुम्हें प्रणाम ! मंगलदातृ हे गोमाता, हम सब करते तुम्हें प्रमाण। दूध दही देती कल्याणी, औ असंख्य हैं तेरे नाम॥ कामधेनु है तु सुरभी है, विश्वरूप तू सुख का धाम। सर्वरूप हैं तेरे जननी, तीर्थरूप रूप तू श्यामाश्याम॥ वेदों में है कीर्ति छा रही, अध्न्या भी है तेरा नाम। परमपवित्र तेजमय तू है, तुष्टि तुष्टिमय तेरा धाम॥ वृन्दावन में कृष्ण कन्हैया, तुझे पालते आठों याम। दूध दही मक्खन मिश्री से खेल खेलते हैं घनश्याम॥ देश हमारा तब कहलाता, सुखसमृद्वि का शोभाधाम। घी दूध की नदिया बहतीं, नहीं गरीबी का था नाम॥ वही स्थिति फिर लाने को, गोसेवाव्रत लें अविराम। गोरक्षा में जान लगादें, पूरण होंगे सारे काम॥ हे… Read More

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"भजन"गोमाता की सेवा करना हर हिन्दू का कर्म है।

गोमाता की सेवा करना हर हिन्दू का कर्म है। गोमाता की रक्षा करना हर हिन्दू का धर्म है।.धृ।. सूखे तिनके खाकर भी जो दूध सभीको देती है। शाकाहारी मूक बेचारी जो दे दो खा लेती है। बछडोंका हमें दूध पिलाती ये दिलकी कितनी नर्म है।. १।. बूढी और लाचारी गैया निशदिन काटी जाती है। जीवन भर अमृत पिलवाती कैसी गति वो पाती है। भारत हिन्दू देशमे होता ये कैसा अधर्म है।. २।. हिन्दू एकता और शक्ति का गोमाता ही प्रतिक है। राष्ट्र चिन्ह इसको बनवाओ बात ये बिलकुल ठीक है। खून हमाराभी ठण्डा नहीं बतला दो ये गर्म है।. ३।. हर नगर गाँव और देशमे गोशालाये बनवाओ। हिन्दुओ की माताओको… Read More

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मारवाड़ी कविता "सुख समृद्धि छावो देश में रोको कटती गांया ने"

जै गो माता की तर्ज: – कबुतरा की मकी बेचदे बार बार अरज करू में भारत का भाया ने । सुख समृद्धि छावो देश में रोको कटती गांया ने ।। ईतिहास भी है गवाही जद जद गांया पे वार विया । धर्म की रक्षा के खातिर ईश्वर का अवतार विया ।। जगत पिता भी बण्यो गुवालो चराणे खातिर गांया ने ।। 1 ।। अग्नि ज्यू धरण लगे हुरज तपे आकाशा । आषाढ मीनो लागता ही बंधे हैं जग ने आशा ।। गायां खातर बरसे ईन्द्र भी पाणी पावे तसायां ने ।। 2 ।। गाय गुवाडे बंधी रेती रोग दोग ने हरती । सुख संपदा का भंडार सदा ही मा भरती… Read More

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भजन "याद करो दधि-माखन-प्रेमी"

॥ श्रीसुरभ्यै नमः ॥ वन्दे धेनुमातरम् ॥ यया सर्वमिदं व्याप्तं जगत् स्थावरजंगमम्। तां धेनुं शिरसा वन्दे भूतभव्यस्य मातरम्॥ ॥याद करो दधि-माखन-प्रेमी॥ गौ, गीता, गंगा, गायत्री, मत भूलो गोपाल को, शीश झुकाओ, मातृ भूमि को भारत हृदय-विशाल को। गौ जननी सम्पूर्ण विश्व की, बतलाता इतिहास है, इसके तन में सभी देवताओं का पावन वास है। अपनी सेवा से उत्पन्न करती कृषकों के भाल को॥1॥ गीता देती समर भूमि में जीवन का उपदेश है, बाधाओं पर विजय दिलाना गीता का संदेश है। देती काट मधुर वाणी से भव के दारूण जाल को॥2॥ भारत के हृदय स्थल पर बहती गंगा की धार है, मरण-घङी में जिसका जल कर देता भव से पार है।… Read More

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"भजन"हमारी विनती सुनो भगवान

॥श्रीसुरभ्यै नमः॥वन्दे धेनुमातरम्॥ यया सर्वमिदं व्याप्तं जगत् स्थावरजंगमम्। तां धेनुं शिरसा वन्दे भूतभव्यस्य मातरम्॥ हमारी विनती सुनो भगवान गौमाता की सेवा है बङे पुण्य का काम। मानो इसकी सेवा को तीर्थ चारों धाम॥ हमारी विनती सुनो भगवान। गौमाता की सेवा का हमें दे दिजो वरदान॥ हमारी………………………॥ सदा-सदा ही दुष्कर्मों से देकर हमको त्रान। गौमाता की सेवा में ही लगे हमारा ध्यान॥ हमारी …………………….॥ कहते हैं यों जग के सारे बङे-बङे विद्धान। गौमाता की सेवा ही हैं सारे सुखों की खान॥ हमारी………………..॥ ‘ग’ अक्षर की महिमा गाते सुनो यों संत सुजान। ‘ग’ गंगा, ‘ग’ गाय, ‘ग’ गीता करत जगत कल्याण॥ हमारी……………….॥ हैं यह परम उदार, दयालु रखती सबका मान। बिना सेवा… Read More

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आ जाओ नन्द नन्दन !!भजन!!

॥श्रीसुरभ्यै नमः॥श्रीगोभ्यः नमः॥ आ जाओ नंद नदंन मेरी गोमाता की जान बचाने,आ जाओ नंद नदंन। हे गो पालक गोपाल तुम्हारा,शत शत है अभिनंदन॥ हम करते हैं तुम्हें वंदन ॥ तुम भक्त सुदामा से मिलने को,नंगे पाँव भगे थे। और अर्जुन की रक्षा करने को,दिन और रात जगे थे। ये भूखी प्यासी गाय तुम्हारी,भटक रही है वन वन।। हम करते हैं तुम्हें वंदन॥01॥ जब विपदा आती भक्तों पर,तब तुम गिरराज उठाते। आज मर रही गो माता ,तुम भगकर क्यों नहीं आते। चहुँ और गऊ को मार रहे है,बन कर इसके दुश्मन॥ हम करते हैं तुम्हें वंदन॥02 गौ की पूजा करते हैं,श्री बह्मा विष्णु भोले। गायत्री सावित्री गौ माँ,दर-दर फिरती डोले। कष्ट… Read More

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गौमाता भजन

॥ श्री सुरभ्यै नमः ॥ ॥ श्री गोमाता भजन ॥ गौ सेवा में थोङा लगा ले प्राणी ध्यान रे॥ झूठी जग की माया प्रभु का ही सच्चा नाम। गौ माता की सेवा ही सबसे बढ़कर काम है। गौ माता की सेवा से खुश होते भगवान रे॥ गौ सेवा में ……………..॥ मोटर बग्घी बंगला न साथ तेरे जा पाएँगे। सखा भ्रात सुत नाती इस धन को व्यर्थ गवाएंगे। इस दौलत को प्यारे तूँ क्यों करता बेकार रे॥ गौ सेवा में……………….॥ न साथ में कुछ तूँ लाया, न साथ में कुछ ले जायेगा। मुट्ठी बांधे आया है ओर हाथ पसारे जायेगा। पूंछ पकङकर गौ की कर वैतरणी पार रे॥ गौ सेवा में…………..॥… Read More

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गूंज उठी यह धरती सारी गौरक्षा के नारों से

॥श्रीसुरभ्यै नमः॥वन्दे धेनुमातरम्॥ गुंज उठी यह धरती सारी गुंज उठी यह धरती सारी गोरक्षा के नारो से-2 जुंज पङो ऐ भारत वालो,गवों के हत्यारों से-2 कहाँ छूपे यदुवंशी सारे झट अपना मुख दिखलाओ। वीर पाण्डवों की संतों फिर मैदानों आओ। गोमाता के प्राण बचाओ, इन पापी गद्दारों से। जुंज पङो ऐ भारत वालो, गवों के हत्यारों से-2 गुंज उठी यह धरती सारी गोरक्षा के नारो से-2 जुंज पङो ऐ भारत वालो………….2 कहाँ गई वो परशुराम के एकलोती संताने, कहाँ गये वो हल्दी घाटी के महाराणा मस्ताना, कहाँ गयी वो वीर रमणीया जो खेली अंगारों से। जुंज पङो ऐ भारत वालो, गवों के हत्यारों से-2 गुंज उठी यह धरती सारी गोरक्षा… Read More

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कविता ***गायों की सेवा करो, रोज नवाओ शीश । खुश होकर देंगी तुम्हें, वे लाखों आशीष ।।

गायों की सेवा करो, रोज नवाओ शीश । खुश होकर देंगी तुम्हें, वे लाखों आशीष ।। + + + बछड़े उनके जोतते, खेत और खलियान । जिनसे पैदा हो रहे, रोटी-सब्जी-धान ।। + + + घास-फूस खाकर करें, दूध, दही की रेज । इसी वजह से सज रही,मिष्ठानों की सेज ।। + + + गोबर करता है यहाँ, ईधन का भी काम । गो सेवा जिसने करी, हो गये चारो धाम ।। + + + गो माता करतीं सदा, भव सागर से पार । इनकी तुम सेवा करो, जीवन देंगी तार ।। + + + गोबर से बढ़िया नही, खाद दूसरी कोय । डालोगे गर यूरिया, लाख बीमारी होय ।।… Read More

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