गो एंव गोवर्धन पूजा

गोवर्धन पूजन विधि- दीपावली के बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर उत्तर भारत में मनाया जाने वाला गोवर्धन पर्व मनाया जाता है। इसमें हिंदू धर्मावलंबी घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धननाथ जी की अल्पना (तस्वीर या प्रतिमूर्ति) बनाकर उनका पूजन करते है। इसके बाद ब्रज के साक्षात देवता माने जाने वाले गिरिराज भगवान [पर्वत] को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। गाय बैल आदि पशुओं को स्नान कराकर फूल माला, धूप, चन्दन आदि से उनका पूजन किया जाता है। गायों को मिठाई खिलाकर उनकी आरती उतारी जाती है तथा प्रदक्षिणा की जाती है। गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर जल, मौली, रोली, चावल, फूल… Read More

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गोवत्स द्वादशी की हार्दिक शुभकामनाये

HAPPY GOVATSA DWADASHI इस दिन प्रिय गौमाता का पूजन तथा गौसेवा कि जाती हैँ। गोवत्स द्वादशी व्रत कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की द्वादशी को मनाया जाता है.इस दिन गायों तथा उनके बछडो की सेवा की जाती है. सुबह नित्यकर्म से निवृतहोकर गाय तथा बछडे का पूजन किया जाता है. यदि घर के आसपास भी गाय और बछडा नहीं मिले तब गीली मिट्टी से गाय तथा बछडे को बनाए और उनकी पूजा कि जाती है. इस व्रत में गाय के दूध से बनी खाद्य वस्तुओं का उपयोग वर्जित होता है. गौ भगवान श्रीकृष्ण को प्रिय हैं. गौ पृथ्वी का प्रतीक है, गौमाता में सभी देवताओं के तत्त्व निहित होते हैं.… Read More

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गोपाष्टमी

ब्रज संस्कृति का यह एक प्रमुख पर्व है। गायों की रक्षा करने के कारण भगवान श्री कृष्ण जी का अतिप्रिय नाम ‘गोविन्द’ पड़ा। कार्तिक, शुक्ल पक्ष, प्रतिपदा से सप्तमी तक गो-गोप-गोपियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को धारण किया था। 8वें दिन इन्द्र अहंकाररहित होकर भगवान की शरण में आया। कामधेनु ने श्रीकृष्ण का अभिषेक किया और उसी दिन से इनका नाम गोविन्द पड़ा। इसी समय से अष्टमी को गोपोष्टमी का पर्व मनाया जाने लगा, जो कि अब तक चला आ रहा है। इस दिन प्रात: काल गायों को स्नान कराएँ तथा गंध-धूप-पुष्प आदि से पूजा करें और अनेक प्रकार के वस्त्रालंकारों से अलंकृत करके ग्वालों का पूजन करें,… Read More

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श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाये

जय जय श्री राधेकृष्ण जय जय श्री राधेश्याम आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की। नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥ बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की। हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की॥ … जय हो नंदलाल की, जय यशोदा लाल की। गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥ आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की। नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥ बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की। हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की॥ आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की। नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥ बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल… Read More

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