गौ वंश जैविक पंचगव्य का प्रयोग एवं महत्व

गौ वंश जैविक पंचगव्य का प्रयोग एवं महत्व 1. पंचगव्य पंचगव्य , एक कार्बनिक उत्पाद विकास को बढ़ावा देने और संयंत्र प्रणाली में उन्मुक्ति प्रदान करने की भूमिका निभाने की क्षमता है। पंचगव्य नौ उत्पादों अर्थात के होते हैं। गाय के गोबर , गोमूत्र , दूध, दही , गुड़ , घी , केला, टेंडर नारियल और पानी। उपयुक्त रूप से मिलाया जाता है और इस्तेमाल किया, इन चमत्कारी प्रभाव है। गाय के गोबर – 7 किलोगाय घी – 1 किलोसुबह और शाम के समय में ऊपर के दो मुद्दों को अच्छी तरह से दोनों मिक्स और 3 दिन के लिए रखना गोमूत्र – 10 लीटरजल – 10 लीटर3 दिन के… Read More

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रोग व पापनाशक पंचगव्य –

रोग व पापनाशक पंचगव्य – रोग व पापनाशक पंचगव्य –   पंचगव्य शरीर के साथ मन व बुद्धि को भी शुद्ध, सबल व पवित्र बनाता है | शरीर में संचित हुए रोगकारक तत्वों का उच्चाटन कर सम्भावित गम्भीर रोगों से रक्षा करने की क्षमता इसमें निहित है | इसमें शरीर के लिए आवश्यक जीवनसत्व (विटामिन्स), खनिज तत्व, प्रोटीन्स, वसा व ऊर्जा प्रचुर मात्रा में पायी जाती है | गर्भिणी माताएँ, बालक, युवक व वृद्ध सभी के लिए यह उत्तम स्वास्थ, पुष्टि व शक्ति का सरल स्त्रोत है |निर्माण व सेवन-विधि : १ भाग गोघृत, १ भाग गोदुग्ध, १ भाग गोवर का रस, २ भाग गाय का दही व ५ भाग… Read More

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पंचगव्य एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था

पंचगव्य एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था   हमारे देश की 70 प्रतिशत से ज्यादा जनता ग्रामीण क्षेत्र में रहती है। प्रचीन काल से ही हमारे गाँव आर्थिक, सामाजिक एवं व्यावसायिक तौर से आत्मनिर्भर थे। परंतु आजकल नजारा बदल गया है। बड़े-बड़े कारखाने खड़े कर दिए गए है। गाँवों को कच्चा माल देने वाला एक माध्यम बना लिया है। गाँव के अंदर जो अनेक कारीगर थे बढ़ई, लुहार, राजमिस्त्री, उन सब लोगों की रोजी-रोटी छिन गई। गाँव के लोग बेकार हो गए हैं और शहर की तरफ दौड़ने के अलावा उनके पास और कोई चारा भी नहीं है। शहर में भी कोई काम न मिलने के कारण वे अनेक गैरकानूनी कामों में लिप्त… Read More

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पंचगव्य का चिकित्सकीय महत्व

पंचगव्य का चिकित्सकीय महत्व गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर का पानी को सामूहिक रूप से पंचगव्य कहा जाता है। आयुर्वेद में इसे औषधि की मान्यता है। हिन्दुओं के कोई भी मांगलिक कार्य इनके बिना पूरे नहीं होते। पंचगव्य का चिकित्सकीय महत्व पंचगव्य का निर्माण गाय के दूध, दही, घी, मूत्र, गोबर के द्वारा किया जाता है। पंचगव्य द्वारा शरीर के रोगनिरोधक क्षमता को बढाकर रोगों को दूर किया जाता है। गोमूत्र में प्रति ऑक्सीकरण की क्षमता के कारण डीएनए को नष्ट होने से बचाया जा सकता है। गाय के गोबर का चर्म रोगों में उपचारीय महत्व सर्वविदित है। दही एवं घी के पोषण मान की उच्चता से… Read More

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गाय के ताजे गोबर की खाद निर्माण सामग्री

गाय के ताजे गोबर की खाद निर्माण सामग्रीगाय का ताजा गोबर250 ग्राम बेन्टोनाइट पाउडर, काली मिट्टी या वसाल्ट250 ग्राम अण्डे के छिलके का चूर्णबायोडायनामिक प्रिपरेशन नामक औषधीय कल्चरईंट, फावड़ा, टाट पट्टी आदि।निर्माण विधिःसबसे पहले तीन फुट चौड़ा, दो फुट लंबा और ड़ेढे फुट गहरा गड तैयार कर लेते हैं। गड्ढे की दीवार ईंटों से चुन दें। अब 60 किलोग्राम गाय का कम से कम 24 घंटे पुराने गोबर में 250 ग्राम अण्डे के छिलके का चूर्ण और 250 ग्राम बसाल्ट पाउडर भलीभांति मिला लें। अब इस मिश्रण को गड्ढे में भरकर इसमें 23 इंच गहरे छिद्र बना लें। इन छिद्रों में बायोडायनमिक प्रिपरेशन भरकर छिद्रों को बंद कर दें। सतह… Read More

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Cow Dung Economy: Fertilizer, Cheap Fuel, Rich Harvest, Prosperity!

What is despised of today by giving it the name of “dung-economy” is in fact the nucleus of prosperity of the Indian people. And that is why our ancient economists have described dung as the abode of wealth and prosperity and thereby impressed upon the unique utility of dung in relation to the Indian economy. If we accept the concept that dung is the nucleus of our prosperity and has no substitute, the following will follow: – Fertilizer will be cheaply available to us. – Food grains can be produced and made available at reasonable rates. – Our soil will retain its fertility. – Cheap fuel will be available to the masses. – Cheap… Read More

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Cow Dung: Manure Fertilizer vs Chemical Fertilizer

Growing Nutritious And Cheap Food Grains No other fertilizer in the world is as cheap and harmless as dung fertilizer. The Indian farmer is able to grow the best and cheapest food grains in the world with the help of dung manure. This alone is capable of providing stability to the Indian economy. However, due to western influence the government of India has resorted to unfrittered slaughter of animals: – resulting in disruption of availability of cattle dung, – forcing farmers to use costly and harmful chemical fertilizers, – thereby pushing up the prices of food grains and ultimately, – affecting the entire economy by throwing it in the dungeon… Read More

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Dung Cakes Are The Cheapest And Most Easily Available Fuel, But…

Abundant food grains may be cultivated, but what if there is no fuel to cook the food?! We cannot eat raw food grains, and for cooking, fuel is necessary. The cheapest and most easily available fuel are dung cakes. It can be available wherever needed. Its flow is unending. Till the time India had not resorted to animal slaughter, the rural population used to get free dung cakes for fuel. The affluent who used to buy dung cakes had to spend only Rs 3 to 5 in a year. Now people have to use kerosene, which has to be imported from countries which are exploiting to great advantage, the folly of our planners.… Read More

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Eco-Farming and Dung: How It Can Reduce Farmer’s Costs

Eco-farming… If agriculture was based on the services of bullocks alone, and instead of chemical fertilizers only had dung or natural manure been used, the farmer would have been spared of the investment in tractors and the interest cost of such investments or the rent of hiring tractors. He would have been spared of the heavy cost of chemical fertilizers and interest, the cost of pesticides, the investment cost in motor pumpsand its interest cost and the cost incurred for diesel or electricity for running such motor pumps. Thus he would have been spared a lot of heavy and at the same time unnecessary expenses which now get added to his cost of production. By… Read More

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Value Of Dung Is More Than Even The Famous Kohinoor Diamond

What is the value of cattle dung? Does this question still need an answer after this series of articles?! The value of dung is really great. It’s much more than even the famous Kohinoor diamond. Not sure?! Read on! “How is it viable to maintain an old bullock which consumes grass of Rs 700 in a year and in return gives dung and urine worth only Rs 500?” How absurd, unscientific and hollow this argument is, is clear from what is described below. The market price for any commodity can be manipulated (i.e. increased or decreased) by speculation and hoarding, by administrative measures, or by similar calculated action. But this cannot… Read More

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