गौमूत्र :

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गौमूत्र : गौमूत्र को सबसे उत्तम औषधियों की लिस्ट में शामिल किया गया है। वैज्ञानिक कहते हैं कि गौमूत्र में पारद और गंधक के तात्विक गुण होते हैं। यदि आप गो-मूत्र का सेवन कर रहे हैं तो प्लीहा और यकृत के रोग नष्ट कर रहे हैं। * गौमूत्र कैंसर जैसे असाध्य रोगों को भी जड़ से […]

पंचगव्य निर्माण और फायदे

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    पंचगव्य निर्माण और फायदे     पंचगव्य का धार्मिक महत्व तो है ही साथ ही मानव जीवन के स्वास्थ के लिए भी कई गुना इसका महत्व है। पंचगव्य क्या है? पंचगव्य गाय के दूध, घी, दही, गोबर का पानी और गोमूत्र का मिश्रण है। इन पाचों चीजों को मिलाने से जो तत्व बनता है […]

16.पञ्चगव्य -चिकित्सा

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…………….पञ्चगव्य -चिकित्सा……………..  १ – क्षयरोग – में गाय का घी खजूर , मुनक्का , मिश्री ,मधु, तथा पिप्पली इन सबका अवलेह बना कर सेवन करने से स्वरभेद ,कास ,श्वास ,जीर्णज्वर तथा क्षयरोग का नाश होता है ।  २ – मुदुरेचन के लिए – १०-२० नग मुनक्को को साफकर बीज निकालकर ,२०० ग्राम गाय के दूध […]

15.पञ्चगव्य- चिकित्सा

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…………….पञ्चगव्य- चिकित्सा……………..  १ – बवासीर के मस्सों से अधिक रक्त स्त्राव होता हो तो ३-८ ग्राम अावलाचूर्ण का सेवन गाय के दूग्ध सेवन बनी दही की मलाई के साथ दिन मे २-३ बार देनी चाहिए ।लाभ अवश्य होगा ।  २ – रक्तातिसार – रक्तातिसार से अधिक रक्त स्राव हो तो आवॅला के १०-२० ग्राम रस […]

14.पञ्चगव्य- चिकित्सा

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…………. पञ्चगव्य- चिकित्सा…………..  १ – बलवर्धन- ११.५ ग्राम ताज़ी अमरबेल को कुचलकर स्वच्छ महीन कपड़े में पोटली बाँधकर १/२ किलोग्राम गाय के दूध में डालकर या लटकाकर धीमी आँच में पकाये । जब एक चौथाई दूध जल जाय ,तब ठंडा कर मिश्री मिलाकर सेवन करने से निर्बलता दूर होती है ।विशेष ब्रह्मचर्य में रहना आवश्यक […]

13.पञ्चगव्य- चिकित्सा

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…………..,,,,पञ्चगव्य- चिकित्सा………………  १ – दाद खुजली- अडूसे के दस से बारह पत्र तथा दो से पाँच ग्राम हल्दी को एक साथ गोमूत्र में पीसकर लेप करने से खुजली व शोथ कण्डुरोग शीघ्र नष्ट होता है ।इससे दाद उक्वत में भी लाभ होता है ।  २ – आमदोष- मोथा ,बच,कटुकी, हरड़ ,दूर्वामूल ,इन्हें सम्भाग मिश्रित कर […]

12. पञ्चगव्य-चिकित्सा

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…………. पञ्चगव्य-चिकित्सा……………  १- संग्रहणी – ताज़े मीठे आमों के पचास ग्राम ताज़े स्वरस मे २०-२५ग्राम गाय के दूध से बनी मीठा दही तथा एक चम्मच शुंठी चूर्ण बुरक कर दिन मे २-३ बार देने से कुछ ही दिन में पुरानी संग्रहणी अवश्य दूर होती है तथा ( संग्रहणी में आम्रकल्प बहुत लाभदायक है )  २ […]

११ – पञ्चगव्य चिकित्सा

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११ – पञ्चगव्य चिकित्सा  १ – अर्कमूल की छाल १० ग्राम ,त्रिफला चूर्ण १० ग्राम ,एक साथ आधा किलो जल में अष्टमांस क्वाथ सिद्ध कर प्रतिदिन प्रात: उसमें १ ग्राम मधु और तीन ग्राम मिश्री मिलाकर सेवन कराये,और साथ ही अर्कमूल को गाय के दूध से बनी छाछ में पीसकर श्लीपद पर गाढ़ा लेंप करे ,४० […]

10 पञ्चगव्य चिकित्सा

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पञ्चगव्य चिकित्सा  १ – आक की छाल तथा आक की कोंपले या छोटी-छोटी कोमल पत्तियाँ ५०-५०ग्राम इन दोनों को २००ग्राम आक के दूध में पीसकर गोला बनाकर मिट्टी के पात्र में मुँह बंद करके गाय के गोबर से बने कण्डो की आँच मे फूँक कर भस्म बना ले । ठंडा होने पर भस्म को निकालकर […]

9 पञ्चगव्य चिकित्सा

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………….पञ्चगव्य चिकित्सा……………. १. आक के भली प्रकार पीले पड़े पत्तों को थोड़ा सा गाय का घी चुपड़ कर आग पर रख दें ।जब वे झुलसने लगे ,झटपट निकाल कर निचोंड लें ।इस रस को गर्म अवस्था में ही कान में डालने से तीव्र तथा बहुविधि वेदनायुक्त कर्णशूल शीघ्र नष्ट हो जाता है । २. आँख का फुला […]